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थाने से थोड़ी ही दूरी पर फर्जी आरटीओ कर रहा था वसूली

ग्वालियर । शहर के हजीरा पुलिस थाना से महज पौन किमी की दूरी पर फर्जी आरटीओ बनकर वाहन चालकों से वसूली कर रहे शिवराजसिंह सिकरवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी एक वाहन चालक व फर्जी आरटीओ के बीच हुई मारपीट के बाद हो सकी। 

लालू पुत्र पुरूषोत्तम बघेल निवासी नायकपुरा, मुरैना बीती रात डंपर में सिंध नदी से रेत लेकर पुरानी छावनी जा रहा था। रात को लगभग 1 बजे जब वह यादव धर्मकांटे के पास पहुंचा तो एक युवक ने हाथ देकर उसे रोका। युवक ने लालू से कहा कि साइड में खड़ी सफेद स्विफ्ट डिजायर कार में आरटीओ बैठे हैं, उनको कागजात चेक कराओ। चालक ने डंपर सड़क किनारे लगाया और कागज दिखाने पहुंचा। कार में बैठे युवक ने कागज देखकर कहा कि कागज अधूरे हैं गाड़ी आगे ले जाने के लिए 2 हजार रुपए देना पड़ेंगे। चालक ने डंपर मालिक राहुल बघेल को फोन कर बुला लिया। वाहन मालिक ने मौके पर पहुंचकर खुद को आरटीओ बताने वाले युवक से पहचान पत्र मांगा। जिस पर युवक ने डंपर मालिक से मारपीट शुरू कर दी। तभी डंपर चालक ने डायल 100 पर कॉल कर सूचना दी। जिसके बाद पुलिस पहुंची। पुलिसकर्मियों ने भी फर्जी आरटीओ से पहचान पत्र मांग लिया। इसके बाद फर्जी आरटीओ बने शिवराज सिंह व उसके साथी पप्पू बैस ने दौड़ लगा दी। पुलिसकर्मियों ने पीछा कर शिवराज सिंह निवासी न्यू संजय नगर को पकड़ लिया। मगर उसका साथी पप्पू बैस भाग गया।

थाना पेट्रोलिंग होने के बाद भी नहीं पड़ी पुलिस की नजर

यादव धर्मकांटे के पास जहां फर्जी आरटीओ के रूप में शिवराज सिंह को पकड़ा गया है उसकी दूरी हजीरा थाने से करीब पौन किमी दूर है। साथ ही इस रास्ते पर रात को पुलिस पेट्रोलिंग की भी व्यवस्था है। मगर इसके बाद भी फर्जी आरटीओ सीधे पुलिस की नजर में नहीं आया। जिसका फायदा उठाकर शिवराज सिंह व उसके साथी ने न जाने कितने ही वाहन चालकों से वसूली की होगी।

मुर्गी को मारने पर हत्या का मामला दर्ज , हत्यारे की तलाश में जुटी पुलिस

मुरैना । जिंदा इंसान की मौत पर केस दर्ज होने में भले ही देर हो जाये लेकिन मध्यप्रदेश पुलिस ने एक मुर्गी की मौत पर केस दर्ज करने में बिल्कुल भी देर नहीं की ।
पुलिस ने तफ्तीश के बाद आरोपी के खिलाफ कार्यवाही का भरोसा भी दिलाया है।

यह मामला चम्बल घाटी के मुरैना जिले का है , सिविल लाइन थाना क्षेत्र की रहने वाली सुनीता नामक महिला की मुर्गी पड़ोसी के घर में घुस गई , उस मुर्गी के अपने घर मे घुसने से नाराज पड़ोसी ने मुर्गी को डंडे से ऐसा मारा कि वह मुर्गी मर गई ।

सुनीता ने मुर्गी की मौत का हर्जाना माँगा , लेकिन बात न बनते देख महिला पुलिस की शरण मे पहुँच शिकायत दर्ज करवाई , पुलिस ने आईपीसी की धारा 429 के तहत केस दर्ज कर लिया ।

पुलिस मामले की जाँच कर आरोपी की तलाश कर रही है , मुर्गी के पोस्टमार्टम से तय होगा कि मुर्गी की मौत डंडे की मार से हुई है कि नहीं ।

उल्लेखनीय है कि आईपीसी की धारा 429 में आरोपी को 5 वर्ष तक कि सजा तक का प्रावधान है , हालाँकि यह जमानती अपराध है और समझौता योग्य भी है ।

दण्डनीय अपराध नहीं है मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना

न्यूज़ । गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करना अपराध नहीं है, जब तक यह साबित न हो कि ड्राइवर पब्लिक सेफ्टी के लिए खतरा पैदा कर रहा है। यह बात केरला हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कही है। हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के जस्टिस एएम शफीक और जस्टिस पी सोमराजन ने यह बात भी मानी कि गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल पर बात करने से एक्सीडेंट होते हैं और लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है।

कानून बनने तक अपराध नहीं
- डिविजनल बेंच ने कहा कि मौजूदा कानून में गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल पर बात करना अपराध नहीं है। हाईकोर्ट कोच्चि के रहने वाले एमजे संतोष की तरफ से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

- कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वह कार्रवाई तभी कर सकती है जब किसी शख्स द्वारा फोन पर बात करने से लोगों की जिंदगी पर खतरा मंडराता हो।

मोटर व्हीकल एक्ट में नहीं है कोई प्रावधान
- मप्र हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने वाला कोई भी प्रावधान मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 में नहीं है।

- अभी ट्रैफिक पुलिस मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत ऐसे में कार्रवाई करती है। धारा 184 खतरनाक तरीके से वाहन चलाने को लेकर लागू होती है। इसीलिए पुलिस गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल पर बात करने को भी इस श्रेणी में रखकर कार्रवाई कर लेती है।

- मेहरा ने बताया कि सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में यह नियम जरूर बनाया गया है कि गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात करना अपराध है।

- इसमें पहली बार ऐसा करने पर 100 रुपए और दूसरी बार ऐसा करने पर 300 रुपए जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है, लेकिन यह अभी कानून नहीं है।
- नया एक्ट लागू होने के बाद यह कानून बन जाएगा।

किन चीजों पर है पाबंदी
- मोटर व्हीकल एक्ट में शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पाबंदी है। लेकिन इसमें भी शराब की मात्रा तय है। यदि 100 एमएल से ज्यादा शराब पी गई है, तभी पुलिस कार्रवाई कर सकती है। कार्रवाई से पहले पुलिस को जांच करके यह देखना होगा कि अल्होकल की मात्रा 100 एमएल से ज्यादा है या नहीं।

- बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना अपराध है।

- बिना परमिट और बीमा के गाड़ी चलाना अपराध है।

- गाड़ी चलाने पर मोबाइल के इस्तेमाल के लिए जिस धारा 184 के तहत कार्रवाई होती है, उसमें 400 रुपए की पेनल्टी और 6 माह तक की सजा तक का प्रावधान है। यह धारा खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर लागू होती है। इसका सीधे तौर पर माेबाइल को लेकर कोई लेना-देना नहीं है।

- मोटर व्हीकल एक्ट, संशोधन 2017 में गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल पर बात करने पर 5 हजार रुपए की सजा का प्रावधान किया गया है, लेकिन यह एक्ट अभी राज्यसभा में पारित नहीं हुआ।

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